Thursday, 27 October 2016

Dr.Babasaheb Ambedkar

हल्लीच्या मोर्च्यातली बौद्ध 👬 लोकसंख्या पाहून एक विचार मनात आला ....हीच एकी.... हीच सामाजिक भावना .... निवडणूकीत दीसली तर .... नक्कीच .... आपला👉🏻 सरपंच, नगरसेवक, आमदार, खासदार, ....एव्हढंच काय तर👆🏻 भारताचा प्रधान मंत्रीही निळा फेटा घालून भारतीय संविधानाचे ✊🏻रक्षण करण्याची शपथ घेईल ....आणि एका नविण👉🏻 सरकार ची स्थापना होईल ज्याचे नाव असेन👆🏻फक्त आणि फक्त 👉🏻भिम सरकार...🇪🇺🇪🇺 निळे वादळ 🇪🇺🇪🇺🙏🏻जय भिम जय भारत🙏🏻                        


Wednesday, 5 October 2016

The Great Samrat Ashok

विजय दशमी पर आप सभी को बधाई :- महान सम्राट अशोक की शिक्षा अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना।
सम्राट अशोक को बौद्ध होने और बौध धम्म के प्रचार-प्रचार का चर्चा प्रायः सभी लोग करते हैं लेकिन उन्होंने जनशिक्षा के लिए जितना महत्वपूर्ण काम किया, उतना विश्व के किसी राजा-महाराजा ने नहीं किया। उन्होंने कई शिक्षण संस्थान की स्थापना की ।
▪ 304 ई पू:अशोक का जन्म
▪ 286 ई पू: अशोक को अवंति का उपराजा बनाया गया । विदिशा की सेठ कन्या देवी के साथ उनका विवाह हुआ। यही देवी बाद में महादेवी नाम से ख्यात हुई जिससे महेंद्र नामक पुत्र का जन्म 284 ई. पूर्व हुआ।
▪ 284 ई पू: अशोक ने उज्जैन अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना की।
▪ 282 ई पू:राजकुमार महेंद्र व राजकुमारी संघमित्रा के जन्म की खुशी में उज्जैन विश्वविद्यालय और सांची अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना की.।
▪ 280 ई पू:तक्षशिला में भारी जनाक्रोश वहां के उपराजा सुशीम के कारण उभरा। जनाक्रोश शान्त नहीं हुआ तब राजा बिन्दुसार ने अशोक को तुरंत तक्षशिला जाकर उभरे भारी जनाकोश को शांत करने का आदेश दिया। अशोक उज्जैन से पिता राजा बिन्दूसार से राजगृह में मिले और आज्ञा लेकर तक्षशीला गए। तक्षशिला के वासियों को राजकुमार के राज नेतृत्व की जैसे ही खबर मिली, जनता उल्लास से भर गयी। तक्षशिला जाते ही राजकुमार अशोक क्षेत्र का अनवरत दौरा कर जनता से मिले और उनकी शिकायतें सुनकर सुशासन, सुव्यवस्था का भरोसा दिया।
▪ 279 ई पू:अशोक गंधार में अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना की.
▪ 270 ई पू: अशोक राज्याभिषेक होने की अतिशय प्रसत्रता में सम्राट ने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की।
दूसरी शताब्दी में पैदा हुए नागार्जुन इस विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे है। ब्राह्मण इतिहासकार इस विश्विद्यालय को गुप्तकाल से जोड़ते है जो कि गलत है।
▪ 268 ई पू:अशोक उदन्तपुर विश्वविद्यालय की स्थापना।
▪ 266 ई पू:सारनाथ अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना।
▪ 265 ई पू:मथुरा अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना।
▪ 264 ई पू:दन्तपूर अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना(राजकुमार महेंद्र और राजकुमारी संघमित्रा के बौद्ध धम्म के प्रसार के निर्मित भिक्षु बनने पर अतिशय उल्लास में दंतपुर (कलिंग देश की राजधानी) में अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना की गई थी।
▪ 263 ई पू:सारनाथ अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना ।
▪ 260 ई पू:नागरा अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना(नागरा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित हैं आज के गोदिंया जिला से 8 किमी की दूरी पर स्थित हैं) और पवनी ( यह भंडारा जिला, महाराष्ट्र में स्थित हैं) ।
▪ 258 ई पू:श्रीनगर अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना(श्रीनगर का प्राचीन नाम प्रवरपूर था प्रवरपूर का ही अशोक कालीन परिवर्तित नाम श्रीनगर रखा गया. यह स्थान अदितीय धन -धान्य से भरपूर था. इस कारण इस महारमणीक स्थान का नाम सम्राट अशोक ने श्रीनगर रखा. कश्मीर, जम्मू का पूरा पूरा इलाका बौद्धमय था. कश्मीर को सम्राट कनिष्क ने बसाया और बढाया था. कनिष्क बहुत प्रसिद्ध बौद्ध धर्मी सम्राट थे. सम्राट कनिष्क के नाम पर इस नगर का नाम कनिष्कपूर था. यही कनिष्कपूर आज का कश्मीर नगर हैं. कश्मीर राज्य हैं)
▪ 257 ई पू:गिरनार अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना (गुजरात प्रान्त के जूनागढ़ के पास हैं. गिरनार में जो प्रसिद्ध शिलालेख मिला हैं, वह गिरनार के बौद्ध अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) में ही लगाया गया था. गिरनार का शिलालेख बहुत ही प्रसिद्ध शिलालेख हैं)।
▪ 256 ई पू:एरागुंडी अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना(आंध्रप्रदेश की कुर्नल जिला में हैं.256 ई पू मे सम्राट अशोक ने बहुत विशाल अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना की .यहां भी जनशिक्षा के लिए उन्होंने विशाल शिलालेख यानी पत्थर की किताब को गडवाया)
▪ 255 ई पू :गुन्टू अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना(पालकी गुण्टू मैसूर के पास कोपबल तहसील में हैं. मैसूर के पास कई सौ गावों में एक साथ सम्राट अशोक ने अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना करायीं .सभी विद्यापीठों में पत्थर की किताबों का पुस्तकालय बना दिया. इन्हीं किताबों को राज कर्मचारी छागड पर लादकर बांव ले जाकर लोगों को पत्थर की किताबें पढाकर उस पर अमल करने का निवेदन किया करते थे)
▪ 250 ई पू: बोधगया महाबोधि विहार की स्थापना. अशोक ने तीसरी बौद्ध संगीती की याद में बोधगया महाबोधि विहार की स्थापना की .यह आज प्राचीनतम बुद्ध मंदिर के नाम से भारत में मशहूर हैं पुरानी इमारत हैं.।
▪ 245 ई पू:जगदलपुर विश्वविद्यालय की स्थापना .आज यह स्थान बंगलादेश में हैं.
▪ 243 ई पू: कौशाम्बी अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) की स्थापना .अशोक के समय कोशाम्बी बहुत ही प्रसिद्ध नगर था. बौद्ध संस्कृति के लिए यह स्थान ख्याति प्राप्त था.इलाहाबाद से 30 किमी पशिम कोशाम्बी नगर स्थित हैं.
▪ 240 ई पू: विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना .विक्रमशिला बिहार राज्य की भागलपुर जिला में अवस्थित हैं.अशोक काल में विक्रमशिला बहुत ही प्रसिद्ध व्यापारिक केंद्र था. इस प्रकार अशोक कालीन शिक्षा विस्तार के अध्ययन से यह पता चलता हैं कि भारत के कोने-कोने में सम्राट अशोक ने विद्यापीठ की स्थापना की. जहां -जहां विद्यापीठ बनें वहां निश्चित रूप से बौद्ध विहार बनाया गया. विदानों की सर्वसम्मत राय है कि अशोक ने अपने समय करीब 84000 स्तूप ,अध्ययन केंद्र (बौद्ध विहार) बनवाये थे। 
जय धम्म अशोक।

Monday, 26 September 2016

AARAKSHAN

दुसर्याच आरक्षण डोळ्यात  खुपतय ना मग वाचा

ग्रामपंचायती, पंचायत समित्या, झेडप्या यांच्या ताब्यात. आमदारकी, खासदारकी, मंत्रीपदं, मुख्यमंत्रीपदं यांच्या ताब्यात. सुतगिरण्या, साखरकारखाने, दुधडेर्या यांच्या ताब्यात. सोसायट्या, सहकारी बॅंका, शिक्षण संस्था यांच्या ताब्यात. तरी यांच्यावर अन्याय झाला म्हणे! कुणी केला हा अन्याय? गावकुसाबाहेर राहणार्या दलितांनी? जंगलात राहणार्या आदिवासींनी? बिर्हाड पाठीवर घेवून गावोगावी भटकणार्या भटक्यांनी? दिवसभर गाड्यावर काही वाही विकून पोट भरणार्या मुसलमानांनी? सांगा  मराठ्यांनो तुमच्यापैकी किती जन गावा बाहेर पालं ठोकून राहतात? किती जनांना बूड टेकायला जमीन नाही? किती जन फुटपाथावर झोपतात? किती जन झोपडपट्टीत  राहतात? किती जन नगर पालिकेच्या गटारी उपसतात? रेल्वे रुळावरची घान साफ करतात? किती बायका रस्ते झाडतात? किती जन सुलभ शौचालयं चालवतात? किती जन डोक्यावरून मैला वाहतात? यांचं आरक्षण तुमच्या डोळ्यात खुपते ना? मग घ्या आरक्षण आणि करा ना ही कामं ! आम्हीही आरक्षण सोडायला तयार आहोत. फक्त जमीनीचं आणि संपत्तीचं एकदा समान पूनर्वाटप करा. आहे हिंम्मत? 

तुम्हाला अॅट्रोसिटीचाही  भयंकर त्रास होतो म्हणे! मग संपवून टाका ना जातीयता. गावकुसाबाहेरच्यांना गावात घ्या. महारा मांगाला पोरी द्या. भिला, भंग्याच्या पोरी घ्या. पारध्या, कातकर्याला शेजार द्या. कोणाही दलितावर बहिष्कार टाकू नका.जातीवरून हिनवू नका, शिवीगाळ करू नका.  आम्ही स्वत: हून  अॅट्रोसिटी रद्द करण्याची मागणी करू. आम्हाला काय जातीची हौस नाही

Saturday, 24 September 2016

मराठा आरक्षण

मर्सडीज, फोरचूनर,सफारी, स्कार्पियो, xuv झायलो, डस्टर , वेगवेगळ्या कंपन्यांच्या करोडो,लाखो गाड्या ,... आणि अशा लाखो गाड्यांची तोबा गर्दी दिसते..काय तो श्रीमंतीचा थाट तो....नंतर कळलं.... समजलं काय जमाना आला बाबासाहेब यांनी मागासवर्गीय लोकांना दिलेला आरक्षण साठी आत्ता तर मराठा वेटिंग लिस्ट हि सरकारी नोकर्यांसाठी आरक्षण मागायला आली आहे...

यांना आरक्षण पाहिजे रे बाबा.....

Tuesday, 20 September 2016

याद रहेगी कुर्बानी ! Uri attacks


कायरता का तेल चढ़ा है, लाचारी की बाती पर,
दुश्मन नंगा नाच रहे है, भारत की छाती पर,
दिल्ली वाले इन हमलों पर दो आंसू रो देते हैं,
कुत्ते चार मारने में, हम सत्रह शेर खो देते हैं
एटम के बम से डरो नही,सीमा के पार उतरने दो,
यह गैस-तेल,डाटा-वाटा, जन धन,के मुद्दे परे धरो,
अब समय जंग निर्णायक का,
ले शंख युद्ध उदघोष करो,
हम फिर से सत्रह जानें दो,
वो दिन ना हमें दिखाओ जी,
जो होगा देखा जाएगा दुश्मन की जड़ें हिलाओ जी,
जिस दिन आतंक समूचे को,
दोज़ख की सैर करा दोगे,
यूँ समझो उस दिन माताओं की सूनी गोद भरा दोगे,
जब मौत मिलेगी दुश्मन को,
सच में सुभाग मिल जाएगा,
मानो शहीद की बेवा को फिर से
सुहाग मिल जाएगा,
हम हमला करने वालों को नहीं छोडेंगे
यही बात हमने 2008 में भी कही थी। और 2015 में पठानकोट हमले के बाद भी। आज 17 जवानों को खोने के बाद भी हम यही कह रहे हैं। हम नहीं समझ पा रहे कि आखिर यह सिलसिला कब रुकेगा और कितना मजबुत प्रधानमंत्री रोकेगा?
अफसोस की, सिर्फ जनता और सेना मर रही है। हर हमले के बाद आप, एसी रूम में बैठकर सिर्फ मीटिंग करते रहिए ...... 
उच्च स्तरीय मीटिंग. फिर बाहर आकर कहिए हम हमला करने वालों को नहीं छोडेंगे।
पाकिस्तान हमारा दुश्मन राष्ट्र था और हमेशा रहेगा यह सच्चाई है जिसे आप को स्वीकार करना होगा। आप लाहौर में लंच करके आइए या कराची में चाय पीकर, इस सच्चाई से कोई झूठला नहीं सकता। आखिर हम क्यों दोस्ती की तरफ हाथ बढ़ायें। अगर अमेरिका अपने जानी दुश्मन क्युबा से पूरे 90 साल तक दुश्मनी निभा सकता है तो हमें दोस्ती की क्या जरूरत पड़ी है??
सर, कभी सोचा आपने, 2001 में अमेरिका में भी हमला हुआ था और भारत के संसद भवन भी। लेकिन स्थिति किस देश में ज्यादा बदली? हमारे यहां तो इतने हमले हुए कि हम गिन भी नहीं सकते और शोक मनाने के लिए दिवस कम पड़ जाएंगे लेकिन अमेरिका सिर्फ 11 सितंबर को हीं शोक मनाता है।
अब, मृत सैनिकों के नाम और फोटो सार्वजनिक होने के बाद, फुल मलाया चढ़ेगी, देशभक्ति की बात होगी.... फिर हम और आप भी अपने काम में बिजी हो जाएंगे

Monday, 19 September 2016

अॅट्राॅसिटी जनजागरण परिषद, औरंगाबाद

नितीन आगे हत्याकांड 

खैरलांजी हत्याकांड 

सागर शेजवळ हत्याकांड 

स्वप्नील सोनवणे हत्याकांड 


अॅट्राॅसिटी जनजागरण परिषद, २५ सप्टेंबर २०१६ 
वेळ - सकाळी ११ वा 
संत तुकाराम नाट्यगृह , सिडको 
औरंगाबाद